तीन औरतें

By अवधेश प्रीत 844 पढ़ा गया | 5.0 out of 5 (2 रेटिंग्स)
Adventure Women's Fiction Mini-SeriesEnded8 एपिसोड्स
ये कहानी है तीन औरतों और रोशनी की एक झंपोली की। औरतें, जो एक पुरानी ख़स्ताहाल हवेली में कै़द हैं। हवेली यूं तो जर्जर है, लेकिन उसकी चहारदीवारी और लोहे का बड़ा-सा दरवाज़ा बेहद मज़बूत। दरवाज़े की चाभी इन तीनों में से किसी के पास नहीं। पुरुषों की बनाई दुनिया में घुट-घुट कर सांस लेती ये औरतें एक-दूसरे के एकांत में होते हुए भी अपने-अपने एकांत में रहती हैं। अपने-अपने अंधेरों में गुम। झंपोली से आते रोशनी के कतरों को हाथों से रगड़-रगड़ कर झाड़ देने वाली ये औरतें क्या कभी रोशनी की झंपोली खोल पाएंगी? क्या उसमें से आती रोशनी को ये कभी हमेशा के लिए आज़ाद कर पाएंगी?
रेटिंग्स और रिव्युज़
2 रेटिंग्स
5.0 out of 5
पूर्व गतिविधि
"Geeta Malik"

ऐसी कहानियाँ रोंगटे खड़े कर देती है मेरे पढ़ते हुए भेड़िया कहानी की याद आ ...Read more

"Vandana Singh"

3 ओरते मतलब दादी बहु फिर बहु की बहु। अच्छी थी काफी अच्छीRead more

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