चाॅकलेट

By पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ 697 पढ़ा गया | 4.3 out of 5 (4 रेटिंग्स)
Literature & Fiction Mini-SeriesEnded2 एपिसोड्स
‘उग्र’ की इस रचना से पहली बार हिंदी-साहित्य में एक साथ कई चर्चाएं शुरू हुईं। समलैंगिकता को बीच बहस में लाने की वजह से ‘चॉकलेट’ को घासलेटी साहित्य तक कहा गया। अश्लील कहकर इसकी तीख़ी आलोचना हुई। साहित्य और नैतिकता के मामले ने इतना तूल पकड़ा कि बात महात्मा गांधी तक पहुंच गई। गांधीजी ने इस रचना को पढ़ कर निर्णय दिया कि यह कहीं से भी अश्लीलता को बढ़ावा नहीं देती।
रेटिंग्स और रिव्युज़
4 रेटिंग्स
4.3 out of 5
पूर्व गतिविधि
"ARUN KUMARYADAV"

यह कहानी एक नये संवाद को जन्म देती हैं।Read more

"महेश पांडेय"

यह कहानी शायद 1920-30की अवधि में लिखी गई थी. बाल यौन शोषण और समलैंगिकता भा...Read more

"Jaya Das Mallick"

bahut hi tikhi aur samajik gandagi ko dikhati katha

"Kamlesh Jha"

स्वतंत्रता के नाम पर समाज मे होने वाली अप्राकृतिक क्रियाएं नई पीढ़ी को बर्...Read more

5 Mins 399 पढ़ा गया 0 कमेंट
एपिसोड 2 29-12-2021
3 Mins 291 पढ़ा गया 2 कमेंट

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